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मंगलवार, जून 09, 2015

पूर्वांचल की मस्ती

पूर्वांचल के कण –कण में बिखरी पूर्वांचल की मस्ती
दिया देश को पूर्वांचल ने नेक - अनेक बड़ी  हस्ती |
मंगल ने मंगलाचरण कर स्वतंत्रता का बिगुल बजाया
श्यामनारायण पाण्डेय ने हल्दीघाटी सा - काव्य सजाया |
लक्ष्मी नारायण मिश्रा ने लिखा ऐतिहासिक  नाटक
राहुल सांकृत्यायन खोले शास्त्र घुमक्कण का फाटक |
सिंह अयोध्या हरिऔध ने दिया राष्ट्र को पंचवटी
क्रांतिकारियों से मत पूछो कैसे उनकी सजा कटी |
भोलानाथ गहमरी ,मोती  बी .ए .कविवर राही
जिनके बल पर भोजपुरी है लूट रही वह - वाही |
इस मिट्टी ने दिया विश्व को गौतम बुद्ध महा मानव
और राम - सा अवतारी जिससे   हारे  सारे दानव |
इसके उत्तर में पहरू बन पर्वत खड़ा   हिमालय है
शास्त्र तंत्र का सिद्ध पीठ गोरक्ष नाथ देवालय  है |
सागर सी गहराई वाली एक अनोखी नगरी है
पूर्वांचल में बसी हुई ऎसी ही काशी - नगरी है |
इस नगरी ने हिन्दी को है दिया अनेकों लेखक
भारतेन्दु ,जयशंकर ,मुंशी प्रेमचंद   अन्वेषक |
काशी के उत्तर में स्थित सारनाथ अवशेष अभी
गौतम बुद्ध ने सबसे पहले दिया यहीं उपदेश कभी |
ऎसी इस मनभावन – पावन  मिट्टी की बलिहारी
बाणभट्ट की आत्मकथा लिख दिये  प्रसाद हजारी |
राजनीति  में चंद्रशेखर सिंह पूर्वांचल के नेता
प्रखर ओजस्वी राजनीति  सिद्धान्तों के अध्येता |
अल्हण अद्भुत हुआ साहसी कल्पनाथ सा राजा
नगर-शहर हर गाँव बज रहा जिसके यश का बाजा |
जिसकी कर्मठता अद्भुत थी अनुपम छटा निराली
पूर्वांचल को बना दिया जिसने घाटी हरियाली |
गाँव पहाड़ीपुर उपजाता जो केवल अधिकारी
गहमर ग्राम शेरपुर गाजीपुर सैनिक व्रतधारी |
जयप्रकाश सा इस मिट्टी ने दिया देश को नायक
अभिनेता जन्माने वाला, मधुशाला का गायक |
पूर्वांचल कि मस्ती ने अब्दुल हमीद – सा वीर दिया
गंगा गोमती, और घाघरा सींच रही तस्वीर दिया |
क़ायम रक्खी है अब तक जिसने अपनी परिपाटी को
शत-शत वंदन 'कंचन' करता पूर्वांचल की माटी को |
                                                                रचनाकाल  १९९४  ई.

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