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गुरुवार, मई 01, 2014

लाहौर लुट जायेगा

              लाहौर लुट  जायेगा

शान्ति का पुजारी ये रहा है सदा देश मेरा 
आज भी सभी को शान्ति पाठ ही  पढाता है। 
विश्व में हो शान्ति सभी फले फ़ूले सुखी रहेँ 
विश्व वन्धु वन्धुता का  गीत ही कढ़ाता है। 
सागर पखार रहा पग आदि काल से है 
तेजपुंज हिम मौर शान को बढ़ाता  है। 
आन बान मान  शान  का जो कभी प्रश्न आये 
देशलिए बच्चा बच्चा शीश को चढ़ाता है.
हो शरीफ़ तो शरीफ़ ही सदा बने रहो 
रोज रोज काटना चिकोटी अब छोड़ दो।  
कुत्सित कुभावना से युक्त कुविचार जो है 
काली करतूतों की कड़ी को तुम तोड़ दो। 
देश सिर मौर काश्मीर मेँ  जो उग्रवाद
रोज रोज उसको बढ़ावा देना छोड़ दो। 
पाक है तो पाक ही बना रहे सदैव और 
खुद से भरा हुआ नापाक घट  फ़ोड़ दो। 
अन्यथा सहिष्णुता की सीमा यदि पार  हुई
भाईचारे वाला यह हाथ उठ जायेगा। 
तोप टैंक तेरे सब धरे के धरे रहेंगे
और तेरा पाक ये पुनः टूट  जायेगा। 

युद्ध का बिगुल यदि तुमने बजाया फिर 

याहियाँ सरीखे तेरा धैर्य छूट जायेगा।
सोनरा के सौ और लोहरा के एक घान 
पड़ते कराँची औ लाहौर लुट  जायेगा।


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