पृष्ठ

मंगलवार, जून 25, 2013




दक्षिण भारत यात्रा के दौरान  कन्याकुमारी में सूर्योदय दर्शन की उत्सुकता से समुद्र तट जा पहुंचा ,प्रात कालीन सौन्दर्य देख ही रहा था की एक घड़ी बेचनेवाला आ गया और पत्नी सविता जी से गिडगिडाने लगा - बहन जी सुबह की बोहनी करा दीजिये भैया जी के लिए ये घड़ी ले लीजिए , उसकी शुद्ध हिंदी सुनकर पत्नी ने पूछा कहाँ के रहने वाले हो ? बोला -जौनपुर का पत्नी को दया आ गई , बोलीं -पेट के लिए परदेस में इतना दूर आकर उद्यम कर रहा है , ले लीजिये , मैं उनका दया भाव लखकर उन्हें मना  न कर सका ,और वे घड़ीवाले को पैसे देकर मेरी कलाई में प्रेम से उस घड़ी को बाँधने लगीं , मैं भी इस तरह खड़ा हो गया जैसे घड़ी न होकर कोई अमुल्य वस्तु हो और मन ही मन मुस्कराता रहा [

1 टिप्पणी: