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सोमवार, अप्रैल 22, 2013

दो दोहे

बाधाओं से जूझकर       जो करता संघर्ष 
वह निश्चित ही एक दिन पा  लेता उत्कर्ष . 

मनसा वाचा कर्मणा जो भी करता पाप 
वह अपने ही चाल से     पाता है संताप .




पांडिचेरी में सपत्निक डाक्टर कंचन 
  •  तिरुपति बालाजी में डाक्टर सविता चतुर्वेदी के साथ कंचनजी 

  •  तिरुमला की पहाड़ी पर डाक्टर कंचन एवं सविता 

 तिरुमला की पहाड़ी पर डाक्टर कंचन एवं सविता व पुत्री अनुरंजिका 
 तिरुपति  बालाजी में कंचन 

चेन्नई में परिवार सहित डाक्टर कंचन 

मंगलवार, अप्रैल 16, 2013

तीन दोहे

दर्पण के हो सामने जैसे कोई सूर .
वैसे विधवा माँग से दूर बहुत सिंदूर ..

अमराई में अब नहीं पहले जैसा छाँव 
बात -बात में काटने दौ ड़ रहा है  गाँव  

रिश्ते अब मरने लगे टूट रहे सम्बन्ध 
पैसों से ही हो रहा रिश्तों का अनुबन्ध