पृष्ठ

बुधवार, मार्च 07, 2012

होली में मदमस्त हो करते सब हुडदंग
कीचड़ गोबर धूल संग फेंके रंग बिरंग 
सबकी अपनी रीति है सबका अपना ढंग 
कोई प्रेम परोसता कोई करता जंग 
मान मनौवल ना चले चले जोर बस जंग 
किस पर कितना डाल दें पिचकारी से रंग 
फागुन फूहड़ हो गया या मनमौज उमंग 
कोई नंगा हो चला है कोई अधनंग 
अंदर से बाहर रंगे पी पी कर के भंग 
मसक  अंग सब देत हैं बरबस करते तंग

1 टिप्पणी:

  1. आय हाय! कंचन काया को किसने मसक दिया होली में?
    बहुत सुंदर। शुभ होली।

    उत्तर देंहटाएं