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शनिवार, सितंबर 11, 2010

अच्छा होता भारत से उठ जाती बेईमानी की अर्थी
फलत विघ्नविनाशक जी की आज चतुर्थी
अपने आस पास का करते दूर प्रदुसन
तो सच मुच सार्थक होता ये पर्व पर्युषण
घन वरसा मन भिज गया
भोले भाव में भूल-भूल कर तीज गया
तीनो पर्वो के संग सुन्दर ईद बधाई
कंचन का स्वीकार करे सब पाठक भाई

1 टिप्पणी:

  1. तीनो पर्वों की सुंदर त्रिवेणी बहाई है आपने..
    हिन्दी की प्रतिक्षा है।

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